
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़! बैग में दवाइयां लेकर इलाज करने घर-घर पहुंच रहे मेडिकल संचालक…..

बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के मुरकौल क्षेत्र में मेडिकल की आड़ में मरीजों का इलाज करने की शिकायत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कुशवाहा मेडिकल के संचालक हंसलाल कुशवाहा मेडिकल चलाने के साथ मरीजों का उपचार भी कर रहे हैं। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है और इसकी तत्काल जांच की आवश्यकता है।
स्थानीय स्तर पर शिकायत है कि मेडिकल दुकान से दवाइयां उपलब्ध कराने के अलावा मरीजों को उपचार भी दिया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या मेडिकल दुकान संचालक को मरीजों का उपचार करने की अनुमति है? यदि नहीं तो जिम्मेदार विभाग द्वारा अब तक इस मामले में प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
बैग में दवाइयां, घरों में इलाज करने पहुंच रहे झोलाछाप डॉक्टर
मुरकौल और आसपास के क्षेत्र में कुछ कथित आनंद कुशवाहा, सुभाष बंगाली झोलाछाप डॉक्टर द्वारा बैग में दवाइयां भरकर घर-घर जाकर मरीजों का उपचार करने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा की कमी का फायदा उठाकर यदि बिना अधिकृत योग्यता के उपचार किया जा रहा है तो यह सीधे तौर पर मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है।
पहले भी कार्रवाई, फिर भी नहीं थम रहा सिलसिला
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी कुछ मेडिकल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, बावजूद इसके कथित रूप से नियमों की अनदेखी जारी है। वहीं गलत इलाज के बाद मौत होने की शिकायतें सामने आने का भी दावा किया जा रहा है। इन शिकायतों की स्वतंत्र और विभागीय जांच होना जरूरी है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
जिम्मेदार विभाग की निगरानी पर सवाल
मामले ने स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मेडिकल दुकानों की नियमित जांच कौन कर रहा है? बिना अधिकृत चिकित्सकीय व्यवस्था के इलाज किए जाने की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कथित झोलाछापों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभाग के पास क्या व्यवस्था है?
संचालक से पक्ष जानने का प्रयास, नहीं मिली जानकारी
मामले को लेकर कुशवाहा मेडिकल के संचालक हंसलाल कुशवाहा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि उन्होंने मामले के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
मेडिकल वेस्ट के बाद अब इलाज का मामला
गौरतलब है कि बीते दिनों इसी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट खुले में फेंके जाने का मामला भी सामने आया था। एक ही क्षेत्र से मेडिकल वेस्ट और कथित अनाधिकृत उपचार जैसी शिकायतों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह है कि शिकायतों के बाद विभाग सिर्फ कागजी जांच तक सीमित रहता है या मुरकौल क्षेत्र में मेडिकल दुकानों और कथित झोलाछापों के खिलाफ वास्तविक जांच और नियमानुसार कार्रवाई भी होती है।



