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जिला बनने के बाद भी प्राकृतिक सौदर्य से परिपूर्ण सारंगढ़ अंचल उपेक्षित?

जिला बनने के बाद भी प्राकृतिक सौदर्य से परिपूर्ण सारंगढ़ अंचल उपेक्षित?

जिला बनने के बाद भी प्राकृतिक सौदर्य से परिपूर्ण सारंगढ़ अंचल उपेक्षित?
माड़ोसिल्ली, खपान, मकरी, केकड़ाखोल झरना को लेकर शासन का उदासीन रवैया,
केड़ार बांध, किंकारी बांध, आमाकोनी बांध, अमलीडीपा बांध में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं,
वाटर स्पोर्ट्स और अन्य जलक्रीड़ा गतिविधि से पर्यटन को दिया जा सकता है बढ़ावा,
जिला बनने के बाद भी इस दिशा में प्रयास शून्य ?
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
मानसूनी फुहार से सारंगढ़ अंचल के प्राकृतिक सौदर्य के स्थल लोगो को आकर्षित करने मे कोई कमी नही कर रहे है।पूरा प्रदेश कम वर्षा को लेकर चितिंत है किन्तु सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मे रिकार्ड तोड़ बारिश ने किसानो की
समस्या तो दूर किया ही है साथ ही पर्यटन स्थलो को भी गुलजार कर दिया है। पानी की कलकल धारा के मधुर
आवाज के बीच पर्यटन स्थल का दर्जा पाने से दूर सारंगढ़ के कई प्राकृतिक सौदर्य स्थल अभी सिर्फ पिकनिक स्पाट तक सिमित है।जिला बनने के 4 बरस के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नही हुआ है जिसके कारण से माडोसिल्ली, खपान, मकरी, केकड़ाखोल जैसे वर्षाकालीन जलप्रपात सदाबहार स्थल का रूप धारण नही कर पा रहे  है।

गोमर्डा अभ्यारण्य के हरी-भरी वादियो के साथ सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का अपना अलग की
महत्व है। कल-कारखानो के प्रदूषण से दूर सारंगढ़ अंचल के प्राकृतिक सौदर्य स्थल पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचानबना सकते है किन्तु प्रशासनीक उदासीनता के कारण से आज तक सिर्फ पिकनिक स्पाट के रूप तक की सिमित सारंगढ़के आधा दर्जन से अधिक प्राकृतिक सौदर्यस्थल को तलाश है ऐसे पहल की जो उसकी उदासीनता को दूर करें। सारंगढ़को प्राकृतिक स्थलो का गढ़ कहा जाता है। यहा पर पानी की कलकलधारा के साथ प्राकृतिक रूप से बहने वाली झरना के रूप मे प्रदेश मे विख्यात माडोसिल्ली झरना मन को काफी सकून प्रदान करता है। लगभग 20 फीट की उंचाई से गिरने तथा 20 से 25 फीट की चौड़ाई तक को समेटे इस झरने में नहाने का अपना अलग ही मजा है। लेकिन इस स्थान में पर्यटन की दृष्टि से संसाधन की कमी है। वन विभाग का एक मात्र रेस्ट हाऊस है इसके अलावा यहा पर किसी भी प्रकार से कोई अन्य सुविधाओ का विकास नही हुआ है। इस पर्यटन स्थल जाने के लिये कई प्रकार का पापड़ झेलना पड़ता है। वर्षाकाल में इस पर्यटन स्थल पर जाने के लिये वन विभाग के पास कोई निश्चित पैमाना का गाईडलाईन नही है  इस कारण से रेंजर से लेकर डीएफओ तक से परमिशन का आफिस-आफिस से आम आदमी परेशान हो जाता है। वही रसूखदारो के लिये यहा पर कोई नियम नही है। जरूरत यहा पर आम पर्यटको के लिये विभिन्न प्रकार की सुविधाओ का विस्तार करना है ताकि सारंगढ़ के शान के रूप मे माडोसिल्ली झरना का नाम लिया जा सकें। वही दूसरी महत्वपूर्ण झरने के रूप मे खपान झरना का नाम लिया जाता है। सारंगढ़ से 16 किलोमीटर दूर तेन्दूढ़ार गांव केपास स्थित इस खपान झरने मे पहुंचना काफी दुर्गम है यहा पर 20 फीट की ऊंचाई से गिरने वाला झरना अपनी मनमोहक सौदर्य के लिये जाना जाता है किन्तु यहा पर कुछ भी सुविधा नही है। ना तो रेस्ट हाऊस है और ना ही झरने तक पहुंचने के लिये कोई रास्ता है। इस स्थान को उचित ढंग से विकसित किया जाये तो यह भी विशेष आर्कषण का केन्द्र बन सकता है। वही मकरी झरना को लेकर लोगो मे अभी जबरदस्त जुनून है। अमझर के पास स्थित इस झरने के पास पहुंचने के लिये काफी पापड़ बेलने पड़ते है किन्तु इस स्थल पर पहुंचने से सारे थकान दूर हो जाते है।  सारंगढ़ से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मकरी झरना तक रोजगार गारंटी से सड़क निमार्ण का पहल किया गया था किन्तु रेस्ट हाऊस और अन्य बुनियादी सुविधाओ के विकसित होने से सारंगढ़ अंचल के प्रसिद्ध
प्राकृतिक स्थल के रूप में मकरी झरना का नाम विशेष रूप से लिया जायेगा। वही केकड़ाखोल झरना को भी
विकासित करने पर यह भी काफी प्रसिद्ध झरना के रूप मे जाना जायेगा। इस झरना को लेकर बताया जाता है कि
गोमर्डा अभ्यारण्य के कोर एरिया में स्थित होने के कारण से यहा पर घने जंगल और 100 फीट से अधिक ऊँचाई
इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। किन्तु यहा पर अभी तो आवागमन तक का सुविधा नही है तो आखिर कैसे मे सारंगढ़पर्यटन के क्षेत्र मे प्रदेश के मानचित्र पर अपना नाम अंकित करा पायेगा।
पिकनिक स्पाट तक सिमित है सारंगढ़ के प्राकृतिक स्थल? सारंगढ़ अंचल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बुनियादी सुविधाओ से अपना अलग पहचान बना सकते है।यहा पर मूलभूत सुविधाओ का समावेश होने से यहा पर प्रदेश भर से पर्यटको को आना-जाना शुरू हो जायेगा। इस सुविधा के अभाव  में यह स्थान स्थानीय क्षेत्रवासियो के लिये सिर्फ पिकनिक स्पाट के रूप मे जाना जाता है। यहा पर बुनियादी सुविधाओ का प्रसार होने से सारंगढ़ अंचल का नाम पर्यटन के क्षेत्र मे काफी आगे तक जा सकता है। बरमकेला का
मुनी झरना तथा आमाकोनी का झरना भी एक बड़े केन्द्र के रूप मे विकसित किया जा सकता है। वही घोघरापाट में भी पर्यटन की अपार संभावना है। किन्तु जिला बनने के 4 बरस के बाद भी इस दिशा मे जिला प्रशासन का प्रयासशून्य रहा है जिसके कारण से सारंगढ़ अंचल पर्यटन के क्षेत्र में अपनी पहचान नही बना पा रहा है।
केड़ार बांध, किंकारी बांध, आमाकोनी बांध, अमलीडीपा बांध में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं,
सारंगढ़-बरमकेला अंचल में सिचाई के लिये कई बांध का निमार्ण कराया गया है। यहा का प्रसिद्ध केड़ार बांध और
बरमकेला का प्रसिद्ध किंकारी बांध पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। वही सारंगढ़ का आमाकोनी बांध, अमलीडीपा बांध भी क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। इन सभी बांधो मे वाटर स्पोर्टस संबंधी गतिविधियो को बढ़ावा देकर इसको स्थानीय रोजगार के साथ जोड़ा जा सकता है। जिससे स्थानीय युवाओ को रोजगार भी मिल सकता है और यहा पर वाटर स्पोर्टस की  गतिविधि से पर्यटन को भी बहुत ज्यादा बढ़ावा मिल सकता है। सारंगढ़ के पानी के प्रचुर स्त्रोत वाले बांधो को लेकर जिला प्रशासन पहल करे तो यहा शानदार पर्यटन का केन्द्र बन सकता है।

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