
सारंगढ़ : खर्री बड़े मे “अवैध पत्थर खदानो” को “नीची जमीन” बताकर व्यापक मात्रा में फ्लाईएश की
डंपिंग?
60 हजार मिट्रिक टन के अनुमति के नाम पर 3 लाख टन फ्लाईएश का भराव?
प्रशासनिक अधिकारियो की मिलीभगत से सारंगढ़ क्षेत्र में राख का भंड़ारण?
अवैध पत्थर खदान पटवाकर कर रहे है लाखो रूपये की कमाई?
कमीशन के खेल मे सारंगढ़ अंचल फ्लाईएश का डंपिंग जोन बना?
पीएम रोड़ पर धड़ल्ले से चल रही है भारी वाहन,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में अवैध पत्थर खदानो को कागजो पर नीची जमीन बताकर लाखो टन फ्लाईएश को डंप करके मोटा कमीशन गटकने का बड़ा खेल चल रहा है। एक तरफ जहा अवैध पत्थर खदानो को कार्यवाही के स्थान पर फ्लाईएश डालकर अवैध खनन का सबूत को नष्ट किया जा रहा है वही दूसरी
ओर लाखो टन प्लाईएश डालकर मोटी रकम का व्यवस्था भी कर लिया जा रहा है बस इसके लिये कागज पर अवैध पत्थर खदान को लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताना पड़ रहा है जहा बरसात मे बाढ़ आने पर पानी भरने की संभावना रहती है। लेकिन कही से भी यह भनक नही लगने दिया जा रहा है कि यह अवैध पत्थर खदान रहा है। खर्री बड़े मे भी बड़े स्तर पर फ्लाईएश डंपिंग का काम चल रहा है यहा पर 0.7351 हेक्टेयर भूमि पर 60 हजार मिट्रिक टन फ्लाईएश डंप करने का अनुमति दिया गया है किन्तु यहा पर अभी तक 5 लाख टन लगभग अवैध फ्लाईएश डाल दिया गया है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बनने के बाद से ही सारंगढ़ अंचल को पावर उद्योगो के
अपशिष्ट पदार्थ फ्लाईएश का डंपिंग स्थल बनाने का सुनियोजित षड़यंत्र चल रहा है। टिमरलगा, गुड़ेली, कुटेला के बाद खर्री बड़े मे भी अवैध पत्थर खदानो मे किया गया अवैध उत्खनन का सबूत मिटाने के लिये प्रशासनिक मिलीभगत से यहा फ्लाईएश का अवैध डपिंग का बड़ा सुनियोजित खेल खेला जा रहा है। इस खेल की शुरूवात ग्राम पंचायत के सरपंच के द्वारा शुरू होता है जो कि एसडीएम कार्यालय में इस बात का प्रस्ताव देता है कि उनके क्षेत्र में लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र है जहा पर पानी का भराव होता है। इस भराव होने के कारण से यहा पर फ्लाईएश का डंपिंग किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के साथ ही ट्रांसपोर्टर को एनओसी भी प्रदान कर दिया जाता है जिसके आधार पर एसडीएम के द्वारा प्रस्ताव प्रतिवेदन के साथ खनिज विभाग, कलेक्टोरेट होते हुए क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल रायगढ़ चला जाता है जहा पर पावर प्लांट को बड़े स्तर पर फ्लाईएश डंपिंग करने का स्थान मिल जाता है। बताया जा रहा है

कि इस पूरे खेल मे ग्राम पंचायत से लेकर अनुमति देने वाले अधिकारियो से फाईल स्वीकृति कराने मे पूरा ग्रुप सक्रिय रहता है। जिसके कारण से जल्द ही फ्लाईएश का बड़े स्तर पर भंड़ारण सारंगढ़ क्षेत्र में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि लो
लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताकर खर्री बड़े क्षेत्र में भी बडे स्तर पर फ्लाईएश डंपिंग का बड़ा काम बीते दिनो धड़ल्ले से चल रहा है। यहा पर लगभग 60 हजार मिट्रिक टन फ्लाईएश डंपिंग का अनुमति दिया गया है किन्तु उसके एवज में नाला किनारे और अवैध पत्थर खदानो में लगभग 3 से 5 लाख टन अवैध रूप से फ्लाईएश डंप कर दिया गया है। अवैध
पत्थर खदानो को लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताकर यहा पर फ्लाईएश का डंप करने का कार्य मे रायगढ़ के किसी ट्रांसपोर्टर का नाम सामने आ रहा है जिसने प्रशासनिक अधिकारियो और खनिज विभाग से मिलीभगत करके पूरा अनुमति दिलाया है और उसके एवज मे अनुमति प्राप्त मात्रा के स्थान पर दो से पांच गुना तक अधिक फ्लाईएश को डंप करक मोटी कमाई कर दिया है।

कमीशन के खेल मे सारंगढ़ अंचल फ्लाईएश का डंपिंग जोन बना?
सारंगढ़ के खर्री बड़े मे फ्लाईएश डंपिंग का बड़ा खेल हुआ है। यहा पर अवैध खदानो का बड़ा झमेला था और बिना अनुमति के अवैध पत्थर खदानो की संख्या हमेशा से खनन माफियाओ के लिये सरदर्द बना हुआ था। ऐसे मे खर्री बड़े में अवैध पत्थर खदानो को राजस्व अधिकारियो के रिकार्ड और मैदानी अमले के रिकार्ड में लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताकर यहा पर फ्लाईएश डंपिंग का अनुमति दिलाने का बड़ा खेल खेला गया है। यहा पर इस कार्य के लिये हर स्तर पर अलग-अलग कमीशन दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रति टन के हिसाब से कमीशन यहा पर फिक्स है। जिसके कारण से निर्धारित 60 हजार मिट्रिक टन फ्लाईएश के स्थान पर 5 लाख मिट्रिक टन फ्लाईएश का भराव खर्री बड़े मे कर दिया गया है। नाला के किनारे शासकीय भूमि पर किया गया अवैध उत्खनन से बने हुए अवैध पत्थर खदानो को फ्लाईएश से भरकर अवैध उत्खनन पर भी पर्दा डाल दिया गया है। इस कार्य मे लाखो रूपये का वारा-न्यारा किया गया है। पीएम रोड़ पर धड़ल्ले से चल रही है भारी वाहन,

खर्री बड़े क्षेत्र के चारो ओर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क फैला हुआ है। कही पर से भी खर्री बडे जाने पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क ही मिलेगा। फिर भी इस पीएम सड़क पर लगभग हर दिन सैकड़ो भारी वाहन धड़ल्ले से संचालित है। चेतावनी और प्रतिबंध वाले बोर्ड लगे हुए है और स्पष्ट लिखा है कि यहा पर 12 टन से अधिक वजनी के भारी वाहनो के प्रवेश प्रतिबंधित है। किन्तु दिन-रात फ्लाईएश के भारी वाहन इस रोड़ पर बेधड़क संचालित है। बताया जा रहा है कि एक 16 चक्का वाहन मे 30 टन से लेकर 60 टन तक प्लाईएश लोड़ रहता है। ऐसे मे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम रोड़ का यहा पर क्या हाल होगा। किन्तु अधिकारियो के संरक्षण में सारंगढ़ में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर धड़ल्ले से दादागिरी करते हुए अवैध फ्लाईएश की वाहने चल रही है और इसको रोक लगाने वाला यहा पर कोई नही है।

“अवैध पत्थर खदानो” को “नीची जमीन” पर जांच जरूरी?

सारंगढ़ के अवैध पत्थर खदानो को कागज पर नीची जमीन यानि लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताकर फ्लाईएश डंपिंग के लिये बड़ा खेल खेलने वाले माफियाओ को बेनकाब करने का काम बहुत जरूरी है। अधिकारियो से मिलीभगत करके सारंगढ़ को पावर प्लांट के अपशिष्ट राख यानि फ्लाईएश का डंपिंग क्षेत्र बनाकर खुद कर विकास करने वाले सफेदपोश
चेहरो का नाम भी जल्द उजागर करके सारंगढ़ को प्रदूषण की चपेट मे डालने वाले ऐसे लोगो का पोल पट्टी भी खोलना जरूरी है। बिना स्थल जांच किये ही अवैध पत्थर खदान जो कि 200 फीट से 300 फीट तक गहरा खोदा गया है और पोकलैंड़ के सहारे यहा पर अवैध उत्खनन हुआ है उसको लो लेयिंग एरिया यानि निचला ईलाका या नीची जमीन या कम ऊंचाई वाला क्षेत्र बताकर यहा फ्लाईएश डंप करने
की अनुमति दिलाने का बड़ा खेल जो खेला गया है उसकी शिकायत शीघ्र ही मुख्यमंत्री सहित उच्च स्तर पर किया जायेगा ताकि सारंगढ़ में चल रहे भर्राशाही पर लगाम लगाया जा सकें।



