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किन्नर के लिए पत्नी को छोड़ा: 5 लाख रुपए गुजारा भत्ता भी देने को तैयार, लेकिन पत्नी ने किया इंकार, जानिए महिला आयोग ने क्या कहा…

किन्नर के लिए पत्नी को छोड़ा: 5 लाख रुपए गुजारा भत्ता भी देने को तैयार, लेकिन पत्नी ने किया इंकार, जानिए महिला आयोग ने क्या कहा…

किन्नर के लिए पत्नी को छोड़ा: 5 लाख रुपए गुजारा भत्ता भी देने को तैयार, लेकिन पत्नी ने किया इंकार, जानिए महिला आयोग ने क्या कहा…

रायपुर. महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए रायपुर संभाग के पांच जिलों के लिए  राज्य महिला आयोग ने सुनवाई की. महाजन सुनवाई में 292 प्रकरण लिस्टेड किए गए थे, जिसमें 148 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया है. इसमें एक अनोखा मामला भी सामने आया है. जिसमें पत्नी ने पति के किन्नर से अवैध संबंधों के चलते पारिवारिक जीवन नष्ट होने पर कार्रवाई की गुहार लगाई है. महिला आयोग ने अगली सुनवाई में पति और दूसरे पक्ष को उपस्थित करने के लिए मुंगेली एसपी को निर्देशित किया है.इस महा जनसुनवाई में रायपुर संभाग के जिला बलौदाबाजार के 43 में से 16 प्रकरण, धमतरी के 12 में से 07 प्रकरण, रायपुर के 199 में से 115 प्रकरण महासमुंद के 23 में से 06 प्रकरण और गरियाबंद के 15 में से 04, प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया. कुल 292 प्रकरण में से 48 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया. दोनों पक्षों के कुल 62 पक्षकारो ने पंजीयन कराया था. बाकी पक्षकार अनुपस्थित है, जिसमें आगामी निराकरण हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया जायेगा.

पति का किन्नर से संबंध

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका अनावेदक आपस में पति-पत्नि है. अनावेदक पति अनावेदक किन्नर के साथ संबंध में है, जिसके कारण आवेदिका का परिवारिक जीवन नष्ट हो चुका है. आयोग की समझाईश पर आवेदिका को आजीवन भरण-पोषण के लिए 5 लाख रुपए देने के लिए तैयार है. यह तीन किश्तों में दिया जायेगा. इसके लिए आवेदिका ने बताया कि अनावेदक की लगभग 10 एकड़ जमीन है. 50-60 हजार रूपया प्रति माह कमाता है. अतः अनावेदक इतने कम मुआवजे के लिए तैयार नहीं है. वह सभी अनावेदक के खिलाफ पुलिस में कार्रवाई चाहती है. क्योंकि अनावेदक पति अनावेदिका किन्नर के साथ अवैध संबंध में रहता हैं, इसलिए एस.पी. मुंगेली के माध्यम से अनावेदकगणों की उपस्थिति का आदेश आयोग द्वारा दिया गया.

सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका विधवा बहू है और अनावेदक उनके सास-ससुर, ननद है. एक ही घर में उपर-नीचे रहते है, जिससे आपस में विवाद होता रहता है. घरेलू हिंसा का मामला न्यायालय में है. अनावेदिक ने कहा कि वह घर से आवेदिका को नहीं निकालेंगे, बिजली पानी बंद नहीं करेंगे. चूंकि न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है. इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया. प्रोटेक्शन ऑफिसर को नियुक्त कर दोनों पक्षों की निगरानी 1 वर्ष तक किये जाने का आदेश दिया गया.

एक प्रकरण में आवेदिका ग्राम भुंजिया मुड़ा में पंचायत सचिव है. इसके पूर्व मालगांव और नागाबुड़ा में पंचायत सचिव पी अनावेदक 1, 2 दोनों गांव के उपसरपंच है. दोनों गांव में अनावेदकगण द्वारा कराये गए कार्यों का बिल भुगतान दोंनो अनावेदक के शिकायत के कारण रुका है. अनावेदक परेशान करने झूठी शिकायत करता है. उभय पक्ष ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व कि शिकायत वापस लेकर वर्तमान में कोई शिकायत नहीं है. भविष्य में भी कोई शिकायत नहीं करेंगे. आवेदिका को किसी भी तरह से परेशान नहीं करेंगे. इस स्तर पर आवेदिका की समस्या का समाधान हो गया है. स्थाई समाधान के लिए आयोग द्वारा सी.ई.ओ. गरियाबंद को आर्डरशीट की काॅपी के साथ एक पत्र प्रेषित किया जायेगा. इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.

इसी तरह एक मामले में आवेदिका और अनावेदक आपस में मां-बेटा है. अनावेदक पुत्र से पूछे जाने पर उसने स्वीकारा की वह मजदूरी करता है. मकान 25 लाख का है. जिसका निर्माण आवेदिका ने किया है और जमीन भी आवेदिका की है. आयोग ने कहा ऐसी स्थिति में आवेदिका उस मकान में आजीवन रहेगी. वह जिसे चाहे उसे मकान देने की अधिकारिता रखती है. इसके लिए आवेदिका गरियाबंद नगर पालिका में उस मकान में संयुक्त हिस्सेदार के रूप में अपना नाम दर्ज करा सकती है. इसके लिए सी.ई.ओ. नगर पालिका गरियाबंद को पत्र लिखा जायेगा. आवेदिका भी इस आधार पर संयुक्त हिस्सेदार के रूप में अपना नाम आवेदिका दर्ज करा सकती है. आयोग की समझाईश के बाद प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.

एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि आवेदिका व अनावेदक क्र. 1 पति-पत्नि है. अन्य महिला आवेदिका के पति की अवैधानिक पत्नी है. उसके कारण आवेदिका से मारपीट करता है. अनावेदिका 2 (अन्य महिला) के भड़काने पर आवेदिका से बुरा बरताव करता है. दोनों के व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशार्ट निकालकर अभिलेख में रखा गया है. इसके आधार पर प्रमाणित होता है कि अनावेदक 1 और 2 के बीच अवैध संबंध हैं और वह आवेदिका को प्रताड़ित कर रहे है. आवेदिका ने शुक्रवार को आयोग के समक्ष मांग रखी कि वह मकान में दोनों बच्चों के साथ रहना चाहती है. वहीं अनावेदक(पति) आवेदिका व दोनो बच्चों के साथ रहने का प्रयास ना करें और उनके जीवन में दखलंदाजी ना करें. अनावेदक (पति) शासकीय सेवा में होते हुए और अपनी पत्नी से तलाक लिए बगैर अनावेदक 2 के साथ अवैध संबंध में रहकर सिविल सेवा का उल्लंघन कर रहा है, जो कि अनावेदक को उसके शासकीय सेवा से निलंबित करने का पर्याप्त आधार है. महिला आयोग अनावेदक क्र. 1 के निलंबन की अनुशंसा करती है. इस आशय का पत्र आयोग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी को दिया जायेगा. अनावेदिका क्र. 2(अन्य महिला) आवेदिका का घर तोड़ने के लिए जिम्मेदार है. उसके पास रहने का स्थान नही है. इसके लिए अनावेदक क्र 2 को नारी निकेतन भेजने की अनुशंसा आयोग द्वारा किया गया. इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है.

महिला आयोग की सुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका का पति 3 वर्ष से फरार है और आवेदिका के संपर्क में नही है. अनावेदकगणों ने ढूंढने का प्रयास भी नहीं किया गया. आवेदिका के पति के द्वारा बनाये गये मकान को 15 लाख में अनावेदकगणों ने बेच दिया है और आवेदिका को कोई हिस्सा नहीं दिया है. अनावेदक ने बताया कि गांव में डेढ़ एकड़ जमीन है. आवेदिका अपने बच्चों का हक का बंटवारा के लिए न्यायालय में आवेदन लगा सकती है. इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है.

एक अन्य प्रकरण में अनावेदिका का ईलाज तांत्रिक से किया गया था. आवेदिका ने बताया गया कि आवेदिका के टोना करने से अनावेदिका की तबियत खराब हुई है. तांत्रिक ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल भी किया था. इसके कारण पूरे परिवार और समाज में आवेदिका की छवि धुमिल हुई. आयोग ने कहा कि इस मामले में आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ मानहानि का आपराधिक और कानूनी मामला दायर कर सकती है. इस बात का पता चलते ही अनावेदकगणों ने आयोग के समक्ष माफी मांगी और कहा कि जानबूझ कर आवेदिका को प्रताड़ित करने की उनकी मंशा नहीं थी. आयोग ने समझाईश दिया गया कि कोई भी अनावेदकगण आवेदिका के खिलाफ इस तरह की प्रताड़ना नहीं करेंगे. जिस तांत्रिक ने यह वीडियों जारी किया था उसका नाम, पता और मो.नं. देने पर साइबर थाना में उसके खिलाफ केस दर्ज कराने में सहयोग करेंगे. इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया.

 

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