
केलो नदी में गंदा पानी न गिरे, इसके लिए 85 करोड़
- नगर निगम ने एनजीटी को दी जानकारी, गार्डन का भी प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा
रायगढ़, 25 अक्टूबर। दो एसटीपी का निर्माण होने के बावजूद केलो नदी में गंदगी कम नहीं हुई। एनजीटी ने जब इस मामले पर संज्ञान लेकर जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया तो नगर निगम ने एक नए प्रोजेक्ट की जानकारी सौंपी। एनजीटी को बताया गया है कि केलो नदी में गंदे पानी को बहने से रोकने के लिए करीब 82 करोड़ का एक प्लान तैयार किया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केलो प्रवाह में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए केलो नदी के दूषित होने पर नोटिस जारी किया था। ज्वाइंट कमेटी ने भी पाया कि नदी में कचरा भी डाला जाता है और गंदा पानी भी छोड़ा जाता है। इस पर नगर निगम को नोटिस दिया गया था। निगम ने केलो नदी को दूषित होने से बचाने के लिए एक नए प्रस्ताव की जानकारी दी है। बताया गया है कि बरसात में गंदे पानी को सीधे नदी में प्रवाहित होने से रोकने के लिए सीवर नेटवर्क पर काम करना होगा।
कई बड़े नालों और नालियों को जोडक़र पानी का उपचार करना होगा। इंदिरा नगर नाला और केवड़ाबाड़ी नाला जैसे बड़े नालों को सीधे केलो नदी में मिलने से रोकना होगा। इसके लिए 82.28 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाया गया है। इस राशि से नदी के आसपास एक नया सीवर नेटवर्क तैयार किया जाएगा। गंदे पानी को डायवर्ट करने से ही नदी का पानी साफ होगा। अभी भी समलाई मंदिर के नीचे नदी किनारे से एक बड़ा नाला नदी में मिलता है। कयाघाट के पास भी बड़ा नाला है। ऐसे कई छोटे-बड़े नाले हैं जिनका गंदा पानी केलो में गिरता है। इन नालों को बंद कर पानी को एसटीपी की ओर डायवर्ट करना होगा।
गार्डन और सौंदर्यीकरण के लिए 30 करोड़
निगम ने एनजीटी को जानकारी दी कि केलो नदी के सौंदर्यीकरण और एक गार्डन निर्माण के लिए भी 30 करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है। शासन से मंजूरी मांगी गई है। इससे भी केलो नदी को साफ रखने में मदद मिलेगी। नदी में ठोस कचरा डालने से रोकने के लिए नेट और स्क्रीन भी लगाने का प्रस्ताव है।