
ओडिशा से अवैध धान परिवहन पर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती, दो ट्रकों से 605 बोरी धान जब्त
बरमकेला पुलिस की कार्रवाई ने फिर उठाए सीमा पार धान परिवहन पर सवाल; पिछले साल की तरह इस बार भी धान खरीदी सीजन में तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने की होगी परीक्षा
सारंगढ़ टाइम्स न्यूज | बरमकेला।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन नजदीक आते ही ओडिशा से धान के अवैध परिवहन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सीमावर्ती इलाकों में दूसरे राज्य से धान के परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण करना प्रशासन के लिए हर साल बड़ी चुनौती रहा है। इसी बीच बरमकेला पुलिस ने दो ट्रकों से कुल 605 बोरी धान जब्त कर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सीमावर्ती क्षेत्रों से धान के अवैध परिवहन पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए शासन-प्रशासन की निगरानी कितनी प्रभावी है?
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ओडिशा के बरगढ़ से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे टाटा कंपनी के दो वाहनों को रोककर जांच की गई। पहले वाहन से 290 बोरी और दूसरे वाहन से 315 बोरी धान जब्त किया गया। दोनों वाहनों के चालकों का संबंध मध्य प्रदेश के देवास जिले से बताया गया है। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 106 के तहत जब्ती की कार्रवाई की है।
हालांकि, इस मामले में धान के वास्तविक स्वामित्व, परिवहन दस्तावेजों, खरीद के स्रोत और निर्धारित गंतव्य को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि धान का परिवहन किन परिस्थितियों में किया जा रहा था और क्या इसमें धान खरीदी से जुड़े किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।
पिछले साल भी होती रही कार्रवाई, फिर भी नहीं थमा अवैध परिवहन का सवाल
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि ओडिशा से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में धान के परिवहन पर निगरानी प्रशासन के लिए विशेष महत्व रखती है। पिछले धान खरीदी सीजन में भी बरमकेला और ओडिशा सीमा से जुड़े क्षेत्रों में कार्रवाई की खबरें सामने आती रही थीं। इसके बावजूद अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सवाल बने रहे।
कार्रवाई के बाद कुछ वाहन पकड़ में आना निश्चित रूप से निगरानी का हिस्सा है, लेकिन असली चुनौती उन रास्तों और नेटवर्क पर अंकुश लगाने की है, जिनके माध्यम से नियमों को दरकिनार कर धान का परिवहन किए जाने की आशंका रहती है। केवल वाहनों को पकड़ने तक सीमित रहने के बजाय धान के स्रोत, खरीदार, संबंधित व्यापारियों और परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच भी महत्वपूर्ण है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय कुछ लोगों को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहती हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति या समूह को धान की तस्करी से जोड़ने के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करे।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के सामने बड़ी प्रशासनिक चुनौती
धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखना और दूसरे राज्यों से होने वाले संभावित अवैध धान परिवहन पर नियंत्रण करना जिला प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में इस बार सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सबकी नजर रहेगी।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सीमावर्ती मार्गों पर सख्त निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाएगी? क्या संदिग्ध वाहनों की नियमित जांच होगी? क्या राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर धान के स्रोत एवं परिवहन दस्तावेजों की जांच की जाएगी?
इन सवालों का जवाब केवल जब्ती के आंकड़ों से नहीं, बल्कि इस बात से मिलेगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों की जांच कितनी गहराई से होती है और दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।
शासन को चेतावनी: सिर्फ जब्ती नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी
ओडिशा से छत्तीसगढ़ में धान लाने के प्रत्येक मामले को स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि धान का परिवहन निर्धारित नियमों का उल्लंघन करके किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। विशेषकर धान खरीदी सीजन में दूसरे राज्य से आने वाले धान की जांच, परिवहन दस्तावेजों का सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है।
शासन और जिला प्रशासन को चाहिए कि बरमकेला सहित ओडिशा सीमा से लगे संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जाए। जरूरत के अनुसार जांच चौकियां सक्रिय की जाएं, अलग-अलग विभागों की संयुक्त टीमें बनाई जाएं और बार-बार सामने आने वाले संदिग्ध परिवहन मामलों की विस्तृत जांच की जाए।
साथ ही, कार्रवाई के बाद जब्त धान के संबंध में जांच की प्रगति और नियमानुसार की गई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि आम लोगों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
अब देखना होगा, इस बार कितनी प्रभावी होगी कार्रवाई
बरमकेला पुलिस द्वारा दो ट्रकों से 605 बोरी धान की जब्ती एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है, लेकिन इससे सीमा पार धान परिवहन की पूरी समस्या का समाधान हो गया, ऐसा नहीं कहा जा सकता। धान खरीदी सीजन में प्रशासन की वास्तविक चुनौती ऐसे मामलों को रोकना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित अनियमितता की निष्पक्ष जांच करना है।
अब सवाल यह है कि क्या इस बार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन केवल वाहनों की जब्ती तक कार्रवाई सीमित रखेगा, या ओडिशा से धान के परिवहन से जुड़े पूरे संदिग्ध नेटवर्क की भी जांच होगी?
धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था पूरे सीजन प्रभावी बनी रहे। इस बार प्रशासन की रणनीति, कार्रवाई की निरंतरता और जांच के परिणाम ही तय करेंगे कि अवैध धान परिवहन की चुनौती से किस हद तक निपटा जा सकता है।



