
ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा बेहतर शिक्षा का आधार
रायगढ़, 14 जून 2026
ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से रायगढ़ जिले के विकासखंड लैलूंगा अंतर्गत ग्राम पंचायत तोलमा में नए शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन के निर्माण के लिए 77.32 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र के विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगी, बल्कि ग्रामीण अंचल में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी रखेगी।
जिला खनिज संस्थान न्यास द्वारा स्वीकृत यह परियोजना रायगढ़ जिले के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रशासनिक स्वीकृति के अनुसार विकासखंड लैलूंगा के ग्राम पंचायत तोलमा में आधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल भवन का निर्माण कराया जाएगा। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए गठित डीएमएफ निधि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। इस नए विद्यालय भवन के निर्माण से तोलमा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता और अवसर भी बढ़ेंगे।
11 मई 2026 को आयोजित डीएमएफ ट्रस्ट की शासी परिषद की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद 27 मई को तकनीकी स्वीकृति और 2 जून 2026 को प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई। इस परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत उच्च प्राथमिकता वाले कार्य के रूप में शामिल किया गया है। स्वीकृत परियोजना के अनुसार विद्यालय भवन का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग, रायगढ़ संभाग द्वारा कराया जाएगा। विभाग को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से 365 दिनों के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के लिए सख्त निर्देश जारी
डीएमएफ शासी परिषद ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्य एजेंसी को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कार्यस्थल पर स्थायी सूचना फलक लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें योजना का नाम, स्वीकृत राशि, डीएमएफ का लोगो तथा कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होगी। इसके अलावा निर्माण कार्य के प्रत्येक चरण में भौतिक सत्यापन और फोटोग्राफी अनिवार्य की गई है। कार्य प्रारंभ होने से पहले, निर्माण अवधि के दौरान और कार्य पूर्ण होने पर विभिन्न कोणों से फोटोग्राफ प्रस्तुत करने होंगे। कार्य प्रगति और व्यय की मासिक रिपोर्ट प्रत्येक माह की 5 तारीख तक डीएमएफ कार्यालय को भेजना भी अनिवार्य किया गया है। वित्तीय अनुशासन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। स्वीकृत राशि का उपयोग केवल इसी परियोजना के लिए किया जाएगा। किसी प्रकार की अनियमितता, राशि के दुरुपयोग या स्वीकृत लागत से अधिक व्यय होने पर संबंधित एजेंसी पूरी तरह जिम्मेदार होगी। वहीं निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर सुधार कार्य का पूरा खर्च भी एजेंसी को स्वयं वहन करना पड़ेगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ सरकार की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सीधे स्थानीय समुदायों के सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए किया जा रहा है। नए विद्यालय भवन के निर्माण से आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा और क्षेत्र का शैक्षणिक विकास नई गति प्राप्त करेगा।



