
सारंगढ़ शहरी सीमा से लगा हुआ प्रस्तावित चूना पत्थर खदान में आ रही है 16 सौ एकड़ निजी भूमि?

18 सौ एकड़ में खुलेगी 3 चूना पत्थर खदान,
सारंगढ़ अंचल का हो जायेगा खदानीकरण,
प्रदूषण से हो सकता है जीना मुहाल,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
पान, पानी और पालगी की नगरी सारंगढ अब शीघ्र ही प्रदूषण की नगरी के नाम से भी प्रदेश में जाना जायेगा। शहरी सीमा से लगा हुआ क्षेत्र में 1800 एकड़ के क्षेत्रफल में 3 चूना पत्थर खदान खुलने से पूरा क्षेत्र प्रदूषित हो जायेगा। नगर पालिका सारंगढ के वार्ड क्रमांक-1, वार्ड क्रमांक-10 और वार्ड क्रमांक-2 से लगा हुआ चूना पत्थर खदान का सर्वे अभी चल रहा है। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इस खदान का खनिपट्टा आबंटन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी तथा इसके लिये ई-नीलामी किया जायेगा। इस चूना पत्थर खदान में 1600 एकड़ से अधिक निजी
भूमि आ रही है जिसका अधिग्रहण किया जा सकता है।
दरअसल सारंगढ़ अंचल में खनिज पदार्थ के रूप मे चूना पत्थर का विशाल भंड़ार
उपलब्ध है और चूना पत्थर की डिमांड़ लगातार बढ़ रही है। चूना पत्थर मुख्य रूप से सीमेंट उद्योग में कच्चे माल के रूप में, इस्पात उत्पादन में फ्लक्स के रूप में, और निर्माण कार्यों (कंक्रीट, सड़कें) में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह कृषि में मिट्टी की अम्लता कम करने, कांच निर्माण, कागज, पेंट, और प्लास्टिक उद्योगों में भी महत्वपूर्ण रूप से प्रयुक्त होता है। चूना पत्थर के मुख्य उपयोग
के रूप मे यह सीमेंट उद्योग पोर्टलैंड सीमेंट के उत्पादन के लिए यह प्राथमिक कच्चा माल है।
वही कांक्रीट, डामर के लिए एग्रीगेट (गिट्टी) और भवन निर्माण के पत्थरों के रूप में उपयोग में तथा ब्लास्ट फर्नेस में लोहे से सल्फर और फॉस्फोरस जैसी अशुद्धियों को दूर करने के लिए फ्लक्स के रूप में उपयोग मे आता है। इसके अलावा कांच, कागज, पेंट, प्लास्टिक, रबर और टूथपेस्ट में फिलर के रूप में भी इसका उपयोग है। यह एक बहुमुखी खनिज है जो रासायनिक और निर्माण दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
ऐसे में खनिज विभाग की नजर टोपो सीट पर सारंगढ़ शहर से लगा हुआ क्षेत्र के चूना पत्थर की बाहुल क्षेत्र पर है। इसी कारण से सारंगढ़ की शहरी सीमा से लगा हुआ क्षेत्र में 3 विशाल चूना पत्थर खदान की स्वीकृति की प्रकिया बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा 3 चूना पत्थर खदानो को स्वीकृति हेतु प्रस्तावित है उसमें पहला खदान खैरहा चूना पत्थर खदान का है जो कि 212 हेक्टेयर का होगा।
वही कुटेला- दुर्गापाली चूना पत्थर खदान 90 हेक्टेयर का होगा तथा खम्हारडीह चूना पत्थर खदान 428 हेक्टेयर का होगा। अर्थात तीन पत्थर खदान मिलाकर लगभग 730 हेक्टेयर भूमि का उपयोग किया जायेगा जो कि लगभग 1800 एकड़ का हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस चूना पत्थर ब्लाक की स्वीकृति के लिये राजस्व विभाग और वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है तथा इसके लिये सर्वेक्षण का कार्य भी सुचारू रूप से गतिमान है।
1600 एकड़ निजी जमीन को किया जायेगा अधिग्रहण?
शासन द्वारा चूना पत्थर ब्लाक खोलने का प्रस्तावत रखा गया है उसमें खैरहा चूना पत्थर खदान का नाम पहले स्थान पर है इसमें चंदाई, जूनाडीह, खैराहा, रापांगुला तथा सारंगढ़ के 212 हेक्टेयर जमीन आयेगा। वही खम्हारडीह में भैंसथान, भोजपुर, गाताडीह, खम्हारडीह, कुटेला,पचपेड़ी और सुलौनी गांव शामिल है यह चूना पत्थर ब्लाक 428 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रस्तावित है। जबकि कुटेला- दुर्गापाली चूना पत्थर खदान में हरिहरपाली, कुटेला और खम्हारडीह गांव शामिल है जहा पर 90 हेक्टेयर
भूमि पर चूना पत्थर खदान की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। शासन के द्वारा जो प्रस्ताव दिया गया है उसके अनुसार चंदाई में 1.651 हे., जूनाडीह में 40.112 हेक्टेयर, खैरहा में 55.736 हेक्टेयर, रापांगुला में 95.155 हेक्टेयर तथा सारंगढ़ में 5.844 हेक्टेयर निजी भूमि आयेगा सब मिलाकर 212 हेक्टेयर जमीन में चूना पत्थर खदान खुल सकता है।
वही खम्हारडीह चूना पत्थर खदान में भैंसथान में 30.279 हेक्टेयर, भोजपुर में 46.212 हेक्टेयर, गाताडीह में 105.193 हेक्टेयर, खम्हारडीह में 65.003 हेक्टेयर, कुटेला में 21.529 हेक्टेयर, पचपेड़ी में 90.655 हेक्टेयर और सुलौनी गांव में 0.425 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है यह चूना पत्थर ब्लाक 428 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रस्तावित है। वही कुटेला-दुर्गापाली चूना पत्थर खदान में हरिहरपाली में 12.403 हेक्टेयर, कुटेला में 49.915 हेक्टेयर और खम्हारडीह गांव में 22.646 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है जहा पर 90 हेक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खदान की स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। बताया जा रहा है कि उक्त निजी भूमि को शासन के द्वारा प्रति हेक्टेयर के दर से निर्धारित दर पर मुआवजा दिया जायेगा।



