
ईंट भट्टा से मजदूरों को छुड़वाकर सकुशल छत्तीसगढ़ लाया गया

छत्तीसगढ़ से लगभग 30 से 40 प्रतिशत लोग रोजी रोटी के लिए दूसरे दूसरे राज्यों पर हर साल पलायन करते है, जिसमें सबसे ज्यादा ईंट भट्टा और भवन निर्माण के काम होता है, हर वर्ष की तरह सारंगढ़ जिला के विभिन्न गांव से भी झारखण्ड राज्य के गुमला जिला में A S ईंट भट्टा कंपनी पर मजबूरीवश काम करने के लिए मजबूर हो गए , जिसमें नाबालिक बच्चे भी शामिल है , यह मजदूर लोग लगभग पिछले 3 माह से भट्टा पर काम कर रहे थे , प्रोडक्शन कम होने पर ईंट भट्टा मालिक सतीश यादव द्वारा मजदूरों को गाली गलौज, मार पीट किया गया जाता था ,महिलाओं को गंदी नजरों से देखा जाता था , मूलभूत सुविधा से वंचित रखा गया , सप्ताह में प्रत्येक परिवार को राशन सामग्री के लिए केवल एक हजार रूपये भट्टा मालिक द्वारा दिया जाता था , बीमार पड़ने पर कोई मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं था , मालिक का अत्याचार दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा था ,

ऐसे में मजदूरों ने एक बार छुपकर घाघरा थाने में आप बीती बताई लेकिन वहां पर स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मालिक को बता दिया , जिस मालिक और क्रूरतापूर्वक व्यवहार करने लगा ,एक मजदूर किसी भी तरह से भट्टा से भागकर छत्तीसगढ़ पहुंचा और पलायन के मुद्दों पर लंबे अर्से से काम करने वाला सामाजिक कार्यकर्ता सुशील अनंत को संपर्क किया , सुशील अनंत वर्तमान में KHUBCHAND EMERGENCY RESPONSE FOUNDATION सामाजिक संस्था का फाउंडर , डायरेक्टर है , सुशील अनंत द्वारा झारखंड राज्य के गुमला जिला के कलेक्टर महोदया और पुलिस अधीक्षक महोदय को ईमेल के जरिए पत्र व्यवहार भेजा और फोन पर बात कर मजदूरों को तत्काल मालिक के चंगुल से छुड़वाकर छत्तीसगढ़ भेजने के लिए कहा गया , गुमला जिला श्रम विभाग और रेवेन्यू विभाग द्वारा मजदूरों को बंधक मुक्त कराकर दिनांक 17/02/2026 को शाम 5 बजे महेंद्रा बस से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना किया गया, और आज दिनांक 28/02/2026 की सुबह सारंगढ़ सकुशल वापस लौट कर सभी मजदूरों के चेहरे पर खुशी का लहर देखने को मिला

क्या कहते है वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सुशील अनंत
छत्तीसगढ़ में देखा जाए तो पिछले लगभग 12 वर्षों से पलायन के मुद्दों पर काम करते आ रहा हूं , जिसमें 8 से 10 जिले ऐसे है जहां पर हर साल पलायन का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है , छत्तीसगढ़ सरकार पलायन रोकने में विफल है और स्थानीय प्रशासन भी अपने अपने क्षेत्रों पर इस मुद्दा पर थोड़ा सा भी काम नहीं करता है , जबकि ये हम सब की जिम्मेदारी बनता है ,मजदूर वर्ग के लोगों को ज्यादा से ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ देना चाहिए , न्यूनतम मजदूरी और बंधुआ मजदूरी के विषय पर विशेष जागरूकता होना सुनिश्चित होना चाहिए


