
प्रदेश में सुशासन की दिशा में बड़ा सुधार: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने खत्म की केंद्रीकृत साड़ी क्रय व्यवस्था, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी राशि….

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में लगातार बड़े सुधारात्मक कदम उठा रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े (Laxmi Rajwade) ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की साड़ी क्रय व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीकृत खरीद प्रणाली को समाप्त कर दिया है। अब साड़ी खरीद के लिए निर्धारित राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाएगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी चयन की स्वतंत्रता
नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अब अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार स्थानीय स्तर पर साड़ी का चयन और खरीद कर सकेंगी। यह निर्णय हाल ही में साड़ी खरीद प्रक्रिया को लेकर सामने आए मुद्दों और सुझावों के परीक्षण के बाद लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि लाभार्थियों को वास्तविक स्वायत्तता भी मिलेगी।
डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में राशि
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की सोच के अनुरूप शासन की योजनाओं में अधिकतम राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जा रही है, जिससे बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की भूमिका समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में तकनीक आधारित और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है, और यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
साड़ी का डिजाइन वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा
निर्देशों के अनुसार साड़ी का डिज़ाइन पूर्ववत रखा जाएगा, लेकिन अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श के बाद तय किया जाएगा। विभाग द्वारा साड़ी के रंग और डिज़ाइन की जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं कपड़े के प्रकार जैसे कॉटन, सिंथेटिक आदि का चयन कार्यकर्ता स्वयं स्थानीय स्तर पर कर सकेंगी।
सुधार और हितग्राही हित पर जोर
मंत्री ने कहा कि विभाग में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है और जहां भी आवश्यक होगा, हितग्राहियों के हित में सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रति यूनिफॉर्म 500 रुपये की सीमा लागू
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म दिए जाने का प्रावधान है, जिसमें प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है। यह निर्णय राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लाभार्थियों को सीधे लाभ और निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।



